लेखनी प्रतियोगिता -22-Dec-2022 मेंहदी का रंग
मेंहदी का रंग
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जैसे ही स्टेज पर मिसेज शालिनी सुबोध का नाम पुकारा गया। शालिनी को बहुत गर्व भी अनुभव हुआ। वह स्टेज पर अपने सास ससुर के साथ पहुँची बैसे ही सारा हाल तालियौ की गड़गडा़हट से गूँजने लगा।
और शालिनी को उसके पति को मरणोपरान्त शौर्य चक्र से जैसे ही नवाजा गया शालिनी का सीना गर्व से चौडा़ होगया। और स्टेज से उतरने के बाद वह पुरानी यादों मे खोगयी।
" नहीं ऐसा नहीं होसकता है ईश्वर इतना कठोर कैसे होसकता है कि मेरी बेटी की मैहंदी का रंग अभी तक फीका भी नही हुआ और सुबोध को अपने पास बला लिया। " इतना कहकर ममता बुरी तरह रोने लगी।
अपनी माँ की रोने की आवाज सुनकर शालिनी दोंड़ती हुई अपनी माँ के पास आई और वह माँ को चुप करने की नाकाम कोशिश करती हुई पूछने लगी," मम्मी चुप होजाओ और मुझे भी तो बताओ क्या हुआ है जो आप इतनी बुरी तरह रोये जा रही हो।"
"क्या बताऊँ बिटिया ? हम बरवाद हो गये हमारा सब कुछ उजड़ गया।?"
इतना कहकर ममता ने अपनी बेटी को अपने सीने से लगा लिया।।
शालिनी अभी तक कुछ नहीं समझ सकी थी कि माँ इतनी परेशान क्यौ है। ऐसा क्या होगया है उसकी समझ में कुछ नहीं आरहा था।
तब तक उसके पापा व भाई भी वही आगये। वेदोनौ बिल्कुल चुप थे उनके मुँह से कोई आवाज नही निकल रही थी। उनकी हालत देखकर शालिनी डर गयी और उनसे पूछने लगी," ऐसा क्या हुआ है जो माँ रोरही है और आप दोनौ एक शब्द भी नहीं बोल रहे हो "
शालिनी का दिमाग काम नहीं कर रहा था। आज ऐसी कौनसी आफत आगयी है कि पूरा घर परेशान है।उसकी समझ में कुछ नहीं आरहा था।
उसी समय उसके घर का फौन बजने लगा। शालिनी ने दोंड़कर फौन उठा लिया। उधर से आवाज आई," मम्मी जी अभी शालिनी को कुछ मत बताना उसकी तो अभी मेहदी भी नहीं सूखी है। आप सब उसका ध्यान रखना।
यह सब सुनते ही शालिनी कू हाथ से फौन छूट गया और वह वहीं पर गिर गयी। शालिनी का भाई अमन दोंड़ कर आया और उसने देखा कि फौन से किसी की आवाज आरही है। उसने रिशीवर को फौन के ऊपर रखा और शालिनी को उठाकर चारपाई पर डाला।
जैसे ही शालिनी को होश आया वह अपने हाथ पर लगी मेहंदी देखने लगी। शालिनी की समझ में अब सब आचुका था कि वह विधवा होगयी है और इसी लिए उसकी माँ रो रही है।
शालिनी दो भाईयौ की अकेली बहिन थी उसको बहुत ही लाड़ प्यार में पाला था। अभी उसकी शादी एक महीने पहले ही हुई थी। सुबोध एयर फोर्स में कर्नल था। शालिनी के पापा ने उसकी शादी पर पचास लाख रुपये खर्च किये थे । उन्हौने उसकी शादी पर कोई कसर नही छोडी़ थी । एक बेटी होने के कारण दिल खोलकर पैसा खर्च किया था। सुबोध जैसा दामाद पाकर सभी खुश थे । लेकिन वक्त ने ऐसा करवट बदला कि सब कुछ बदल दिया। खुशियौ के ऊपर गम का साया आगया। अभी तो शालिनी के हाथौ की मेंहदी भी नही सूखी थी ।
सुबोध एक महीने की छुट्टी पर आया था। परन्तु शादी एक दिन बाद ही उसको ड्यूटी पर जाना पडा़ था क्योकि पाकिस्तान ने कारगिल की चोटी पर लडा़ई जैसे हालात बना दिये थे।
इसलिए सुबोध को अचानक ही ड्यूटी पर जाना पडा़ वह शालिनी से प्यार की दो बातें भी नहीं कर सका था। सुबोध शालिनी को जल्दी वापिस आकर मिलने की कहकर ड्यूटी पर चलागया। उसे क्या मालूम था कि वह अब शालिनी से कभी नहीं मिल पायेगा।
शालिनी ने भी कितने सपने देखे थे लेकिन सभी सपने चकना चूर होगये । और वह मिसेज सुबोध से शहीद की विधवा बन कर रहगयी।
शालिनी पर दूसरी शादी करने का दबाब बनाया गया लेकिन उसने साफ कहदिया जो अपने मातृभूमि के लिए शहीद होगया मुझे उनकी विधवा कहलाने पर गर्व है। मै शादी करके उनकी आत्मा को दुःख नही पहुँचा सकती क्यौकि वह मुझसे वापिस आने की कहकर गये थे। मै अगले जन्म में भी उनकी प्रतीक्षा करूँगी।
दैनिक प्रतियोगिता हेतु रचना
नरेश शर्मा "पचौरी"
Gunjan Kamal
23-Dec-2022 11:34 PM
बेहतरीन
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Mohammed urooj khan
23-Dec-2022 01:03 PM
👌👌👌👌
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Mahendra Bhatt
23-Dec-2022 10:08 AM
Nice 👍🏼
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